हिंदी दिवस
१४ सितंबर २०२४ व १६ सितंबर २०२४ को पार्ले टिलक विद्यालय असोसिएशन अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, अंधेरी में *’हिंदी दिवस’* बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कक्षा सातवीं ब की छात्रा कुमारी मोंडकर निविदा के द्वारा हिंदी भाषा के महत्व व उन्नति तथा हमारी राष्ट्रीय पहचान को संरक्षित करने में हिंदी की भूमिका को भाषण के रूप में दर्शाया गया। उन्होंने बताया कि १४ सितंबर १९४९ को संविधान सभा ने यह निर्णय लिया कि हिंदी केंद्र सरकार की आधिकारिक भाषा होगी। इसी निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिंदी को प्रत्येक क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए वर्ष १९५३ से पूरे भारत में प्रतिवर्ष १४ सितंबर को *’हिंदी दिवस’* के रूप में मनाया जाता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्थापित करवाने के लिए काका कालेलकर, हजारी प्रसाद द्विवेदी, सेठ गोविंददास आदि साहित्यकारों को साथ लेकर व्यौहार राजेंद्र सिंह ने अथक प्रयास किए । कार्यक्रम की शुरुआत *श्री व्यौहार राजेंद्र सिंह* जी को माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित कर की गई जिनका जन्म दिवस १४ सितंबर ‘हिंदी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। हिंदी दिवस के कार्यक्रम में कक्षा पांचवी, छठी व सातवीं के विद्यार्थियों ने उत्साह पूर्वक भाग लिया । हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए थे, जिसमें हिंदी हस्तलेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। जिनके विजेताओं को प्रमाण पत्र द्वारा सम्मानित किया गया।
कक्षा पांचवी, छठी व सातवीं के विद्यार्थियों द्वारा हिंदी शिक्षण सहायक सामग्री (Hindi teaching Aids) तैयार की गई वह उनकी प्रदर्शनी सभागृह में की गई। सभागृह में अलग-अलग कई पटल (मेज) लगाए गए थे, जिनमें *’व्याकरण सुधा’, ‘स्वाद की दुनिया’, ‘बूझो तो जाने !’, ‘पहचान कौन ?’,* आदि पटल मौजूद थे । जिनकी सहायता से विद्यार्थी खेल के रूप में हिंदी के नए-नए शब्दों को सीखने का प्रयास कर रहे थे। पहले पटल पर विद्यार्थी हिंदी के कई नए शब्द जैसे पशु – पक्षियों के नाम, फूलों के फलों के नाम, सब्जियों के नाम आदि पहचानने की कोशिश कर रहे थे। *’व्याकरण सुधा’* के अंतर्गत विद्यार्थी अलग-अलग व्याकरण जैसे संज्ञा,विशेषण, समानार्थी शब्द, विरुद्धार्थी शब्द, लिंग, वचन, कारक आदि को खेल के रूप में समझने व पहचानने का प्रयास कर रहे थे। *’स्वाद की दुनिया’* इस प्रदर्शनी के अंतर्गत विद्यार्थी अलग-अलग प्रकार के चीजों को खाकर उनके स्वाद को पहचान कर उनका हिंदी नाम बताने की कोशिश कर रहे थे। *’बूझो तो जाने!’* यह एक पहेलियों का जाल था जहां विद्यार्थी अलग-अलग पहेलियों को सुलझा कर उनके उत्तर ढूंढने का प्रयास कर रहे थे। *’पहचान कौन?’* इस पटल के अंतर्गत विद्यार्थी अलग-अलग सांकेतिक शब्दों द्वारा सही शब्दों को पहचानने की कोशिश कर रहे थे। इसी के साथ ही साथ कक्षा पांचवी – अ की छात्रा कुमारी मस्की काव्या द्वारा हिंदी प्रेम को दर्शाती कविता *”जय हिंदी”* तथा कक्षा सातवीं – ब की छात्रा कुमारी गुप्ता दीत्या द्वारा हिंदी की दशा पर आधारित कविता प्रस्तुत की गई। कक्षा छठी – ब के छात्र कुमार सावंत प्रथम व कक्षा सातवीं – ब के छात्र कुमार शिंदे श्लोक विलास के द्वारा नीतिगत संदेश देती कहानियां प्रस्तुत की गई। इसी के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
हिंदी शिक्षिका ( PTVA’S ENGLISH MEDIUM SCHOOL, ANDHERI)
















